प्राचीन ज्ञान - आधुनिक दृष्टिकोण
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(Ancient Wisdom, Modern Lenses)
लघु वीडियो, जिसे लोकप्रिय रूप से 'रील' कहा जाता है, आज के युवाओं का पसंदीदा संचार माध्यम है। यह वर्तमान डिजिटल युग में घटती ध्यान केंद्रित करने की अवधि के अनुरूप है और साथ ही युवाओं को अपनी रचनात्मकता को उजागर करने तथा अपनी बात संक्षिप्त और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करता है। इसमें कहानी कहने की एक गतिशील कला के रूप में उभरने की क्षमता है, विशेष रूप से तब, जब आप किसी महत्वपूर्ण और मूल्यवान विचार को युवाओं तक पहुँचाने के लिए उनसे जुड़ना चाहते हैं।
भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System - IKS)
भारत सदैव ज्ञान के भंडार के रूप में जाना जाता रहा है। इसे 'भायां रतम् इति भारतम्' के रूप में परिभाषित किया गया है, अर्थात जो ज्ञान के प्रकाश की खोज में निरंतर संलग्न रहता है, वही भारत है।
भारत की ज्ञान परंपरा को विश्व की अन्य ज्ञान परंपराओं से अलग करने वाली विशेषता विज्ञान और आध्यात्मिकता, भौतिक विज्ञान और तत्वमीमांसा का उसका अद्वितीय समन्वय है। यह कहा जा सकता है कि "भारत की आध्यात्मिकता वैज्ञानिक है और उसका विज्ञान आध्यात्मिक है।"
भारत के प्राचीन ऋषि-मुनि जानते थे कि परम ज्ञान तक पहुँचने के लिए उन्हें ब्रह्मांड की सीमाओं और मानव मन की गहराइयों, दोनों का अन्वेषण करना होगा।
ज्ञान की यह गहनता हमारे युवाओं के रचनात्मक मस्तिष्कों के सामने एक चुनौती और अवसर प्रस्तुत कर सकती है, जिससे वे इसके विभिन्न पहलुओं की व्याख्या कर सकें और उन्हें अपने पसंदीदा माध्यम 'रील्स' के द्वारा आकर्षक ढंग से प्रस्तुत कर सकें।
भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) पर आधारित रील्स ज्ञान की उन विविध विधाओं का अद्भुत परिचय प्रस्तुत करेंगी, जिन्होंने सहस्राब्दियों से मानव प्रगति को आकार दिया है।
भीष्म फिल्म फेस्टिवल
भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित
'भीष्म IKS', भारतीय ज्ञान परंपरा की शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी नाम है, जिसके केंद्र पुणे, भारत और कैलिफोर्निया, अमेरिका में स्थित हैं। यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम संचालित करता है। अब तक पूरे भारत तथा विश्व के अन्य भागों से लगभग 10,000 विद्यार्थी इन पाठ्यक्रमों से लाभान्वित हो चुके हैं।
'भीष्म' ने 29, 30 और 31 जनवरी 2027 को पुणे के प्रतिष्ठित फर्ग्युसन कॉलेज में एक भव्य फिल्म महोत्सव आयोजित करने की योजना बनाई है। फर्ग्युसन कॉलेज इस महोत्सव का अकादमिक पार्टनर होगा।
इस महोत्सव को श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट, अयोध्या के महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि जी का आशीर्वाद प्राप्त है।
भारतीय ज्ञान परंपरा के तीन दिग्गज विद्वान, डॉ. कोएनराड एल्स्ट, डॉ. जी. बी. देगलूरकर और डॉ. कपिल कपूर इस महोत्सव के मुख्य मार्गदर्शक हैं। इस महोत्सव का क्यूरेशन प्रसिद्ध अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. नितीश भारद्वाज द्वारा किया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय रील्स निर्माण प्रतियोगिता
नई शिक्षा नीति (NEP) में भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अंतर्गत विभिन्न विषयों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उन क्षेत्रों का अन्वेषण करें, जहाँ भारतीय ज्ञान परंपरा उनके ज्ञान, विवेक, व्यक्तित्व और करियर को समृद्ध बनाने में योगदान दे सकती है।
प्राचीन भारतीय ज्ञान के विशाल भंडार से पुनः जुड़ने में जो समय बीत चुका है, उसे ध्यान में रखते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति व्यापक जागरूकता और उत्साह उत्पन्न करना आवश्यक है, जिससे युवा प्राचीन ज्ञान के विभिन्न पहलुओं का अन्वेषण करने और उनसे लाभान्वित होने के लिए प्रेरित हों।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, अंतरराष्ट्रीय रील्स निर्माण प्रतियोगिता इस फिल्म महोत्सव का एक महत्वपूर्ण आकर्षण होगी।
अपनी असाधारण रचनात्मकता के लिए पहचान प्राप्त करने के अतिरिक्त, यह प्रतियोगिता प्रतिभागियों को आकर्षक पुरस्कार जीतने का अवसर भी प्रदान करती है।
प्रथम तीन पुरस्कार क्रमशः ₹1,00,000, ₹75,000 और ₹50,000 हैं। इसके अतिरिक्त लाखों रुपये मूल्य के कई अन्य पुरस्कार भी प्रदान किए जाएँगे।
निर्णायक मंडल की अध्यक्षता डॉ. नितीश भारद्वाज करेंगे। उनके साथ प्रसिद्ध अभिनेता मनोज जोशी और प्रवीण तरडे भी निर्णायक मंडल में शामिल हैं।
प्रतियोगिता के विस्तृत विवरण के लिए इच्छुक प्रतिभागी वेबसाइट पर जा सकते हैं। bff.bhishmaiks.org
पुरस्कार विजेता रील्स के साथ-साथ अन्य चयनित उत्कृष्ट रील्स का प्रदर्शन भी इस महोत्सव में किया जाएगा।
इसके साथ ही फिल्म उद्योग की प्रमुख हस्तियों द्वारा विशेष रूप से आयोजित संरचित मास्टरक्लासेस भी होंगी, जो उभरते फिल्म एवं रील निर्माताओं के लिए शैक्षणिक और व्यावहारिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी।
भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) पर आधारित स्टार्टअप्स की प्रदर्शनी भी 'भीष्म फिल्म फेस्टिवल' का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण होगी।
इसके अतिरिक्त प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और ज्ञान के प्रमुख विद्वानों द्वारा व्याख्यान तथा पैनल चर्चाओं का भी आयोजन किया जाएगा।
फिल्म निर्माताओं, विद्यार्थियों, इतिहासकारों, संस्कृति के पारखियों, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को पुणे में आमंत्रित करके यह ऐतिहासिक महोत्सव भारतीय ज्ञान परंपरा के गहन और व्यवस्थित ज्ञान को गतिशील, साझा किए जा सकने वाले तथा सिनेमाई उत्कृष्ट रचनाओं में परिवर्तित करेगा।
वास्तव में, यह महोत्सव एक ऐसे सेतु के रूप में कार्य करेगा, जो हमारी समृद्ध प्राचीन विरासत को 21वीं सदी की कंटेंट निर्माण की जीवंत ऊर्जा से जोड़ेगा।
यह भव्य आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जुड़ने और आकर्षक पुरस्कार जीतने का अवसर प्रदान करता है, साथ ही उन्हें एक बड़े मंच पर अपनी रचनात्मकता के लिए पहचान प्राप्त करने का भी अवसर देता है।




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